संदेश

📢 स्पष्टीकरण – प्रधानमंत्री कार्यालय से अग्रसित TET से छूट संबंधी वायरल पोस्ट पर मेरा वक्तव्य

 पिछले कुछ समय से सोशल मीडिया और व्हाट्सऐप ग्रुप्स पर यह संदेश तेजी से प्रसारित हो रहा है कि “प्रधानमंत्री कार्यालय से पत्र मार्क होकर NCTE की सदस्य सचिव को भेज दिया गया है, सुखद परिणाम अपेक्षित है।” कोई भी नागरिक पीजी पोर्टल के जरिए कोई भी शिकायत माननीय प्रधानमंत्री जी के कार्यालय में दर्ज करा सकता है। जिसको प्रकरण के हिसाब सम्बंधित कार्यालय में अग्रेषित की जाती है। ऐसी ही प्रकिया यूपी सरकार में जनसुनवाई पोर्टल को है। ठीक उसी प्रकार पीजी पोर्टल केंद्र आधारित व्यवस्था है हालांकि, वास्तविकता यह है कि यह प्रक्रिया केवल PG Portal (Public Grievance Portal) के माध्यम से की गई है। इस पोर्टल पर कोई भी नागरिक अपनी शिकायत या अनुरोध दर्ज कर सकता है, और उसके बाद वह संबंधित विभाग तक फ़ॉरवर्ड कर दी जाती है। 👉 इसका अर्थ यह बिल्कुल नहीं है कि केंद्र सरकार ने TET से छूट को लेकर कोई औपचारिक निर्णय ले लिया है। 👉 अंतिम निर्णय केवल राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (NCTE) अथवा केंद्र सरकार द्वारा अधिसूचना के रूप में ही जारी होगा। इसलिए अफवाह के चक्कर में न पड़ें। ये ऐसा कुछ विशेष नहीं हुआ है जैसा न्यूज...

📢 उत्तराखंड बेसिक शिक्षकों पर टीईटी फैसले का असर सरकार का रुख

 सुप्रीम कोर्ट के टीईटी अनिवार्यता फैसले के बाद उत्तराखंड सरकार समाधान खोजने में जुटी है। इस फैसले से 12,000 से अधिक शिक्षक प्रभावित हो सकते हैं, जिनकी नियुक्ति 2010 से पहले हुई थी। सरकार और शासन स्तर पर बैठकें हो चुकी हैं, विकल्पों पर विचार किया जा रहा है और विधिक राय भी ली जा रही है। महाराष्ट्र के फैसले के आधार पर उत्तराखंड के शिक्षकों के प्रमोशन और सेवा संबंधी मुद्दों पर असर पड़ सकता है। शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने कहा कि सरकार शिक्षकों की चिंता को गंभीरता से ले रही है और इसे केंद्र के सम्मुख भी रखकर सम्मानजनक समाधान निकालने का प्रयास किया जाएगा। अलग अलग सरकार अपने स्तर से इस प्रकरण में विधिक राय ले रही है। लेकिन अभी स्पष्ट रूप से कोई स्थिति साफ नहीं हो पा रही है। इस फैसले से पूरा महकमा सोच में पड़ गया है। क्योंकि शिक्षकों और बच्चों और उनके परिवारों का हित प्रभावित हो रहा है।

यूपी सरकार का सराहनीय कदम शिक्षकों को जल्द मिलेगी कैशलेस चिकित्सा सुविधा

 लखनऊ | शिक्षक दिवस पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा की गई घोषणा अब लागू होने की दिशा में बढ़ रही है। बेसिक और माध्यमिक शिक्षा विभाग इस योजना के लिए प्रस्ताव तैयार कर रहे हैं। यह निर्णय माननीय मुख्यमंत्री जी के द्वारा बहुत ही सराहनीय है। इससे संबंधित 1 आदेश पिछली साल भी आया था लेकिन उसमें शिक्षकों को प्रीमियम देना था जिससे किसी शिक्षक ने आवेदन ही नहीं किया। योजना के तहत बेसिक, माध्यमिक और उच्च शिक्षा के शिक्षक, शिक्षामित्र, अनुदेशक व रसोइये और उनके परिवारजन कैशलेस इलाज की सुविधा प्राप्त कर सकेंगे। प्रदेश के करीब 9–10 लाख शिक्षकों को इस योजना से लाभ मिलेगा। प्रस्ताव तैयार होने के बाद इसे शासन को भेजा जाएगा और आगे की प्रक्रिया शुरू होगी। वर्तमान में प्राथमिक विद्यालयों में 3,38,590 शिक्षक, उच्च प्राथमिक विद्यालयों में 1,20,860 शिक्षक, 1,42,450 शिक्षामित्र, 25 हजार अनुदेशक और एडेड माध्यमिक कॉलेजों में 65 हजार शिक्षक कार्यरत हैं। उम्मीद यही है कि इस बार शिक्षकों को प्रीमियम देय न हो जिससे अधिक से अधिक कर्मचारी इसका लाभ ले सके।अगर ऐसा हो जाता है तो यह सरकार का बहुत बड़ा कदम साबित हो...

हाईकोर्ट ने कहा कि बेसिक शिक्षा विभाग के अफसर आदेशों का पालन जानबूझकर नहीं करते और यह रवैया याचियों को परेशान करने की नीयत को दर्शाता है, इसलिए अफसरों को अदालत में हाजिर होने का निर्देश दिया गया। ऐसा पहले भी हो चुका है

 बेसिक शिक्षा विभाग के अफसरों पर हाईकोर्ट ने सख्त टिप्पणी की है। कोर्ट ने कहा कि अधिकारी मनमाने ढंग से काम करते हैं और याचियों को परेशान करने के लिए जानबूझकर आदेशों का पालन नहीं करते। 2018 के आदेश का पालन न करने पर कोर्ट ने चेतावनी दी कि अगली सुनवाई पर अपर मुख्य सचिव, प्रधान सचिव (बेसिक शिक्षा) और राज्य शैक्षिक अनुसंधान व प्रशिक्षण परिषद के निदेशक को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होना होगा। ऐसा कई बार हो चुका है जिसमें सचिव या उच्च अधिकारी माननीय न्यायालय के आदेश का पालन नहीं करते। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बेसिक शिक्षा विभाग के अधिकारियों की मनमानी पर कड़ी नाराज़गी जताई है। न्यायमूर्ति मंजू रानी चौहान ने यह आदेश रामपुर की याचिकाकर्ता उज्जमा व चेतना सैनी की याचिका पर दिया। दोनों याचिकाकर्ता 2011 की प्रशिक्षु शिक्षक भर्ती में शामिल हुई थीं, लेकिन जाति प्रमाण पत्र में गड़बड़ी का आरोप लगाकर विभाग ने नियुक्ति पत्र देने से मना कर दिया। इस फैसले को चुनौती देने पर हाईकोर्ट ने 2018 में याचिकाकर्ताओं के पक्ष में आदेश दिया था। कोर्ट ने गंभीर चिंता जताई कि अधिकारियों ने 2018 के आदेश का पालन करने का कोई...

UP बेसिक Holiday list 2025 official अवकाश तालिका आधिकारिक आप लोग देख सकते है

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  छुट्टियों की संख्या हर साल कम होती जा रही है।

UP शिक्षक संगठन ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश के खिलाफ उठाया कदम जिसका असर आने वाले दिनों में देखने को मिल सकता है

 लखनऊ: सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार अब सभी प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों के शिक्षकों के लिए शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) अनिवार्य कर दी गई है। इसके कारण लाखों शिक्षकों की नौकरी पर संकट पैदा हो गया है। अगले दो वर्षों के भीतर सभी शिक्षकों को TET पास करनी होगी। जो कि किसी भी तरह उचित नहीं है। कोई भी नया आदेश लागू होने के बाद से प्रभावी होना चाहिए। इस आदेश के विरोध में शिक्षक संगठन पहले ही आंदोलन शुरू कर चुके हैं। पहले दिन 97,890 शिक्षकों ने पत्र भेजकर अपनी समस्याएं साझा कीं, और 20 सितंबर तक लगभग पाँच लाख पत्र भेजे जाने का लक्ष्य है। शिक्षक संगठन की मुख्य मांग यह है कि 25 अगस्त 2010 से पहले नियुक्त शिक्षकों को TET से छूट दी जाए। इस प्रकरण में देश के समस्त शिक्षक संगठनों को 1 हो जाना चाहिए और पूरे जोर से विरोध करना चाहिए। शिक्षकों का कहना है कि वे पहले ही प्रशिक्षण प्राप्त कर चुके हैं, स्कूलों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा दे रहे हैं, फिर भी उन्हें अब परीक्षा की बाध्यता क्यों दी जा रही है। यदि उनकी मांगें नहीं मानी गईं, तो संघ दिल्ली के जंतर-मंतर पर बड़ा धरना देने की चेतावनी दे रहा...

“समायोजन के तहत नियुक्तियों पर याचिका दाखिल किया गया जिसकी सुनवाई आने वाले दिनों में होगी

 1. समायोजन का शासनादेश/आदेश निरस्त किया जाए, क्योंकि यह बिना TET उत्तीर्ण किए नियुक्ति प्रदान कर शिक्षा नीति और योग्यता के मूल मानकों का उल्लंघन करता है।  मेरा मानना है सरकार ने प्रमोशन नहीं करने के लिए ये कदम उठाया जो कि नियम संगत कतई नहीं था। 2. समायोजन सूची निरस्त की जाए, ताकि अनियमितताओं के आधार पर की गई नियुक्तियों को समाप्त कर प्रक्रिया को पुनः पारदर्शी और न्यायपूर्ण बनाया जा सके। और जो शिक्षक TET पास भी है जूनियर का उनको भी नए सिरे से प्रमोट किया जाए। 3. सरप्लस सूची निरस्त की जाए, क्योंकि यह नियमों का उल्लंघन करते हुए तैयार की गई है और इससे शिक्षा व्यवस्था में असंतुलन उत्पन्न हुआ है।क्योंकि पहले समायोजन में सब लोग सरप्लस थे और दूसरी म में कोई सरप्लस नहीं था हेडमास्टर। 4. समायोजित हेडमास्टर्स को उनके मूल पद पर पुनः नियुक्त किया जाए, जिससे विद्यालयों की प्रशासनिक और शैक्षणिक व्यवस्था सुदृढ़ हो सके। कई विद्यालय एकल हो चुके है। या शिक्षकों की कमी हो गई है। 5. प्रत्येक विद्यालय में न्यूनतम पांच शिक्षक नियुक्त किए जाएँ, ताकि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित की जा सके। ऑनलाइन इ...

TET अनिवार्यता के लिए शिक्षकों का अपने हक के लिए विरोध शुरू

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Source- अमर उजाला ब्यूरो समाचार पत्र  मेरा सुझाव ये है कि सरकार को शिक्षकों के प्रति जिम्मेदार होते हुए राहत प्रदान करने की पूरी कोशिश करना चाहिए। क्योंकि इससे लाखों लोगों का भविष्य अंधकार में जा सकता है।